सोमवार, 11 अक्तूबर 2010

यादें तेरी

यादें तेरी


साथ मेरे हो तुम अगर , तो इस ज़िंदगी को भी छोड देंगे।
एक बार कहकर तो देखो, सारे ज़माने का रुख मोड देंगे॥


अश्क है इन आंखो मे, दिल पर वीरानी छाई है।
क्या करूं मै,आज़ फ़िर उनकी याद आई है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति....

    नवरात्रि की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।जय माता दी ।

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  2. @@@ यादों के सहारे @@@

    बातें करके रुला ना दीजिएगा...
    यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा...

    ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही...
    पर दोस्त बना के यूही भुला ना दीजिएगा...

    खुदा ने दोस्त को दोस्त से मिलाया...
    दोस्तो के लिए दोस्ती का रिस्ता बनाया...

    पर कहते है दोस्ती रहेगी उसकी क़ायम...
    जिसने दोस्ती को दिल से निभाया...

    अब और मंज़िल पाने की हसरत नही...
    किसी की याद मे मर जाने की फ़ितरत नही...

    आप जैसे दोस्त जबसे मिले...
    किसी और को दोस्त बनाने की ज़रूरत नही

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