सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

तुम


तुम

कितनी सुंदर आंखे है तेरी
डूब ज़ाने को ज़ी चाहता है इनमे।
काली घटा ज़ैसी ज़ुल्फ़े है तेरी
समा ज़ाने को मन करता है इनमे।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी......आपको फॉलो कर रहा हूँ |

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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