शनिवार, 31 दिसंबर 2011

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

हमारी राष्ट्रीय भाषा



हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा हैं । अगर आप उत्तर भारत मे रहते है तो बेशक आपको लगेगा कि हिंदी ही हमारी राष्ट्रीय भाषा हैं । लेकिन दक्षिण भारत मे जाने के बाद आप सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि क्या हिंदी ही हमारी राष्ट्रीय भाषा हैं ? क्योंकि आपको वहां हिंदी में कुछ लिखा नही मिलेगा । वहां पर केवल अंग्रेजी या फ़िर कोई क्षेत्रीय भाषा प्रयोग मे लाई जाती है । और अगर हिंदी मे कुछ लिखा भी होगा तो वो कुछ इस तरह होगा कि आपको अफ़सोस होगा कि हमारी राष्ट्रीय भाषा का ऐसा अपमान । इससे अच्छा तो यही है कि अगर आपको हिंदी नही आती, तो आप उसका प्रयोग ना करें ।



रविवार, 20 नवंबर 2011

स्वीटी… (सिर्फ यादें )


स्वीटी…

जब इस दिल के किसी कोने में तुम्हारी याद का दिया ज़गमगाता है, तो मेरा पूरा वजूद बस तुम पर सिमट कर रह जाता है । देखता हूं तो तुम्हारा चेहरा, सोचता हूं तो तुम्हारी बातें । तुम्हारी याद एक धुंधली सी तस्वीर से शुरु होती है । उसी चेहरे की तस्वीर, जिसे पहली बार इन निंगाहों ने देखा था और उम्र भर के लिये अपने दिल मे कैद कर लिया था । वही तस्वीर, जिसका ख्याल तक अगर दिल में आ जायें, तो हाथ खुद-ब-खुद दिल को सम्भालने के लिये उठ जाते है । या फ़िर यूं कहो कि……

तेरा दीदार करते ही रब का ख्याल आया ॥
अब ना कोई हसरत बाकी रही दिल में ॥

कैसे कोई इंसान सिर्फ़ यादों के सहारे सारी उम्र गुजार सकता है । यकीन नही होता ना । मुझे भी नही होता था । लेकिन अब सोचता हूं कि कितना गलत था मै । यादें बहुत खूबसूरत होती है । तो क्या उनके साथ ज़िंदगी नही बितायी जा सकती ।

ज़िंदगी तो तभी ज़ी चुके हम ॥
जब नज़र भर के देखा था उन्होने ॥

अब तो बस जी रहे है, यूं ही । शायद कभी उन्हे अहसास हो हमारे दीवानेपन का । और वो लौट आए हमारी बांहों में । खुदा जाने क्या लिखा है हमारी किस्मत में, उनका दीदार या फ़िर इन्तज़ार, इन्तज़ार और सिर्फ़ इन्तज़ार…………।
अब इस दिल का हाल ना पूछो, मुझसे कुछ कहा नही जाता । आखिर क्यों होता है ऐसा ? क्यों कोई दिल में इस तरह से समा जाता है कि किसी और के लिये जगह ही नही बचती । क्यों उसकी यादों को सीने से लगाए बैठा हूं मै, ये जानते हुए भी कि इस राख के ढेर में कुछ भी नही मिलने वाला । लेकिन क्या सिर्फ़ किसी को हासिल कर लेने को ही प्यार कहते हैं । प्यार तो दिल मे होता हैं और उसे दिखावे की जरूरत नही । ये जानते हुए भी, कि वो कभी लौट कर नही आयेगी, मैने उसे जाने दिया । और शायद ही अब कभी उससे मुलाकात हो ।

ना जाने अब उनसे मुलाकात कब होगी ॥
निकल पडे है हम भी अजनबी राहों पर ॥

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

इकरार भी कैसा कराया



इकरार भी कैसा कराया उस जालिम ने, जरा देखो तो सही ॥
रोकना पडता है अश्कों को भी पलकों पे मचलने से पहले ।।

तेरा दीदार करते ही



तेरा दीदार करते ही रब का ख्याल आया ॥
अब ना कोई हसरत बाकी रही दिल में ॥

शनिवार, 12 नवंबर 2011

स्वीटी - सिर्फ तुम


स्वीटी,

सिर्फ़ एक याद बनकर रह गई हो तुम । हम तो तुम्हारी यादों को इस दिल से लगाए बैठें है । आखिर कब तक इस दिल को यूं ही तडपना होगा तुम्हें याद करके ।

लोग कहते है एक बार शराब चख लो, सारे गम भूल जाओगे । और जो नही पीता, उसे पिलानें वाले भी बहुत मिलते है । लेकिन तुम्हारा ख्याल करते ही बस यही सोचता हूं कि जिसने तुम्हारी आंखों की शराब को चख लिया, उसके लिए कोई नशा बाकी ना रहा । और फिर वो नादान क्या ज़ानें कि……

" ज़ाम छूते ही आता है ख्याल मेरे दिल मे,
तौहीन ना हो ज़ाए कही उनकी निंगाहो की "

एक ही तमन्ना है इस दिल की । बस एक बार दीदार हो जाए उनका, तो इस दिल को सुकून मिल जाएगा । अब तो एक ही गुजारिश करते है…………

" मज़बूर करके मेरे दिल को यार ले चलो
उसकी गली मे फ़िर मुझे इक बार ले चलो "

उम्मीद तो नही है कि उनसे मुलाकात होगी । लेकिन खुदा इतना भी बेरहम नही हो सकता । कभी-ना-कभी, कहीं-ना-कहीं तो वो ज़रूर मिलेंगी इन नज़रों को ।

अब तो बस तुम्हारी यादों के सहारें ही ज़िंदगी कट रही है । ऐसा कोई पल नही, जब तुम्हारी याद इस दिल को ना छूती हो । कभी तुम्हारी बातें, कभी तुम्हारी यादें । बस यूं ही कट जाएगी ये ज़िंदगी अब तुम्हारी यादों के साथ…………

" और तो कौन है ज़ो मुझको तसल्ली देता
हाथ रख देती है दिल पे तेरी बातें अकसर "

हमारा क्या है ? तुम्हारा प्यार ना मिला तो ना सही, तुम्हारा दिया हुआ गम ही कफ़ी है ज़िंदगी गुज़ारनें के लिए ।

ना तुम मुझे समझ पाई, ना मेरे प्यार को । अगर एक को भी समझ लिया होता, तो खुदा कसम तुम्हारे कदम ही ना उठते मुझसे दूर जानें के लिए । लेकिन इस बेरहम किस्मत का क्या करें । जब किस्मत ने ही ना चाहा, तो क्या करेगा दीवाना ।

सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

वो मुझे देखती थी ज़ब भी


वो मुझे देखती थी ज़ब भी
हंसती, मुस्काती रहती थी ॥
ज़ाने क्या सोचा करती थी
हरदम इठलाती रहती थी ॥
ज़ब हुआ परेशां मै थोडा
फ़िर मै उसके नज़दीक गया ॥
पूछा उससे सीधे मैने
क्यो ऐसे करती रहती हो ॥
ना बोली वो कुछ भी मुझसे
आंखो से सब कुछ कह दिया ॥
मेरे अंदर भी मौन हुआ
नज़रों ने ऐसा ज़ादू किया ॥

सब कुछ लुटा देंगे


सब कुछ लुटा देंगे हम भी तेरा प्यार पाने के बाद ॥
क्या-क्या सोचा था हमने तेरे मुस्कुराने के बाद ॥
तुम किसी और की निगाहों में बस गए ॥
और हमारे ख्वाब अधूरे रह गए तेरे ज़ाने के बाद ॥

शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

गुरुवार, 27 अक्तूबर 2011

वो ठंडी-ठंडी हवा


वो ठंडी-ठंडी हवा
और तुम्हारी ज़ुल्फ़ों का लहराना ॥
वो छोटी-छोटी बूंदे
और तुम्हारा शरमा ज़ाना ॥
वो बादल का गरज़ना
और मेरे सीने से लिपट ज़ाना ॥
आज़ भी याद आता है
तुमसे मिल कर बिछुड ज़ाना ॥

मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

ना आना तुम कभी



ना आना तुम कभी मेरी नज़रों के सामने
ये दिल तो पहले ही लहुलूहान हुआ ज़ाता है ॥
कैसे समझाऊं इस नादां दिल को, ये तो
छोटी-छोटी बातों पर परेशान हुआ ज़ाता है ॥

रविवार, 16 अक्तूबर 2011

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

स्वीटी : Once Again


स्वीटी,

तुम कहती थी कि विज़य तुम तो पागल हो और मै हमेशा यही कहता था मुझे पागल ना कहो स्वीटी । प्यार में लोग दिवाने होते हैं, पागल नही होते । लेकिन पागल तो मै तुम्हें समझाते-समझाते हो चुका था ।

"हमने कितनी कोशिश की, तुम्हे अपना बनाने की ।
कहां से सीखी तुमने ये अदा, ज़िद पे उतर ज़ाने की । "

ना ज़ाने क्या कशिश थी तुम्हारी आंखो में कि एक बार देखने के बाद खुद पर काबू नही रह गया था मेरा । बस यहीं सोचा था कि

" हमने पाला मुद्दतो ज़िसे अपने पहलू में ।
इक नज़र तुमने ज़ो देखा, दिल तुम्हारा हो गया । "

" विज़य, आखिर ऐसा भी क्या है मुझमें, जो तुम मेरे पीछे पागल हुए ज़ातें हो । कुछ अपना भी तो ख्याल करो । " मै क्या कहता तुमसे । अपना ख्याल तो ना जाने कब से भूल चुका था मै । अब तो बस एक ही ख्याल था तुम्हारा और अपना ख्याल क्या रखते हम क्योंकि

"अब मौत भी हमको मारेगी क्या
मार हम नज़रो की खाए हुए हैं "

स्वीटी, तुम कहती थी कि तुम्हे मुझसे प्यार है । हां स्वीटी, सच कहा था तुमने, तुम्हे मुझसे प्यार तो है लेकिन प्रेम नही है । प्यार और प्रेम मे बहुत गहरा अंतर हैं । प्यार तो इंसान जानवरो से भी करता है लेकिन प्रेम । तुम नही समझोगी, तुम समझ ही नही सकती । प्रेम को तो उसकी गहराई मे उतर कर ही ज़ाना जा सकता है । लेकिन आज़ भी तुम्हारी याद इस दिल को तडपा जाती है । बहुत याद आती है तुम्हारी ;

"खुद ही को भूल सा गया हूं मै,
क्यों इतना याद आती हो तुम्।
कभी तो सामने आ ज़ाओ मेरी ज़ान,
क्यों इतना सताती हो तुम "

तुम्हें देखकर तो उस खुदा में भी यकीन करने लगें थे हम जिसे कभी माना ही नही था ।

" हम तो खुदा के कभी कायल ना थें
तुझे देखा तो खुदा याद आया "

दिल करता था आठो पहर तुम मेरे सामनें बैठी रहो । पर ऐसी अपनी किस्मत कहां ।

"ना जी भरकर देखा और ना ही बात की
बहुत आरज़ू थी हमें, तुमसे मुलाकात की । "

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

स्वीटी : A memory

प्रिय स्वीटी,
मै तुम्हे तब से प्यार करता हूं ज़ब मैने तुम्हे पहली बार देखा था और देखकर यही सोचा था कि

"मेरे सुकूने-दिल को तो होना ही था तबाह
उनकी भी एक निगाह का नुकसान हो गया "

तुम्हे देखकर ऐसा लगा था कि यही है वो ज़िसकी मुझे तलाश थी । शायद आज़ मेरी तलाश पूरी हो गई । लेकिन वो शायद , शायद ही रह गया ।
तुम्हे याद है एक बार तुमने कहा था कि तुम मुझसे इतना प्यार क्यो करते हो विज़य ? ज़बाब नही मिल रहा था मुझे । और कुछ सवाल ऐसे होते है ज़िनका ज़बाब हमे खुद भी पता नही होता । तुम्हारा सवाल भी कुछ ऐसा ही था । मैने पहली बार सोचा कि आखिर मै तुमसे इतना प्यार करता क्यो हूं ? ज़बाब है कि बस प्यार करता हूं । क्यों करता हूं ये तो मै भी नही ज़ानता लेकिन ये ज़रूर ज़ानता हूं कि बेइंतहा प्यार करता हूं ।
और तुम मेरे करीब, इतने करीब आती गई कि मै सोचने पर मज़बूर हो गया कि

"लाऊंगा कहा से जुदाई का हौंसला
क्यों इस कदर क़रीब मेरे आ रही हो तुम "

बेइंतहा प्यार करता था मै तुमसे, ये ज़ानते हुए भी कि तुम मेरी ज़िंदगी में कभी नही आओगी । लेकिन दिल नही मानता था । बस ऐसा लगता था कि मेरे प्यार को देखकर तुम सब मज़बूरियां भूल ज़ाओगी और मेरे पास आकर कहोगी ,"मै भी तुमसे प्यार करती हूं विजय " लेकिन ऐसा कभी हुआ नही ।
ये तो मै अभी भी मानता हूं कि तुमने मुझे धोखा नही दिया । क्योकि धोखा तो अपने देते है और

" जिसका कोई हो ही ना वो धोखा किससे खायेगा "

हंसने-मुस्कुराने की तो आदत रही है हमारी। लोग तो हमारी हंसी से भी धोखा खा ज़ाते है लेकिन

" खुशी ही हो हर गम के पीछे ये ज़रूरी तो नही
कभी-कभी गम भी बन ज़ाता है मुस्कुराने की वज़ह "

-तुम्हारा और सिर्फ़ तुम्हारा विजय

बुधवार, 24 अगस्त 2011

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

अफ़साना



वो ज़ो अफ़साना-ए-गम सुनकर हंसा करते थे।
इतना रोये कि आंख का काज़ल निकल गया॥

रविवार, 12 जून 2011

शुक्रवार, 6 मई 2011

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

ये फूल


ये फूल ना खिलते आज़ दामन मे मेरे ॥
ज़ो कांटो से दिल को लगाया ना होता ॥

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

हादसे

हादसे क्या क्या तुम्हारी बेरुखी से हो गये॥
सारी दुनिया के लिये हम अजनबी से हो गये॥

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

दिल की तडपन



दिल की तडपन तुम्हे बताएं कैसे ।
दिल का दर्द तुम्हे दिखांएं कैसे ॥
तुम तो हमारी सांसों में बसते हो ।
खुद ही की सांसों को रोक पाए कैसे ॥

ना जी भरकर देखा



ना जी भरकर देखा और ना ही बात की ।
बहुत आरज़ू थी हमें तुमसे मुलाकात की ॥

बुधवार, 5 जनवरी 2011

चांदनी चांद से



चांदनी चांद से होगी तो सितारो का क्या होगा ।
मौहब्बत एक से होगी तो हज़ारो का क्या होगा ॥