शुक्रवार, 6 मई 2011

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

हादसे

हादसे क्या क्या तुम्हारी बेरुखी से हो गये॥
सारी दुनिया के लिये हम अजनबी से हो गये॥

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

दिल की तडपन



दिल की तडपन तुम्हे बताएं कैसे ।
दिल का दर्द तुम्हे दिखांएं कैसे ॥
तुम तो हमारी सांसों में बसते हो ।
खुद ही की सांसों को रोक पाए कैसे ॥

ना जी भरकर देखा



ना जी भरकर देखा और ना ही बात की ।
बहुत आरज़ू थी हमें तुमसे मुलाकात की ॥

बुधवार, 5 जनवरी 2011

चांदनी चांद से



चांदनी चांद से होगी तो सितारो का क्या होगा ।
मौहब्बत एक से होगी तो हज़ारो का क्या होगा ॥

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

बुधवार, 15 दिसंबर 2010

अब जी चाहता है रोने को


अब जी चाहता है रोने को |
आंसुओ से पलके भिगोने को ||
क्यों याद मुझे आती हो तुम |
क्यों मुझे रुला ज़ाती हो तुम ||
ऐसे तुम याद ना आया करो |
ना ऐसे मुझे रुलाया करो ||
आना है तो सच में आओ |
सारी दुनिया को दिखलाओ ||
तुम आज भी मुझ पे मरती हो |
तुम प्यार मुझ ही से करती हो ||


-अंकित कुमार 'नक्षत्र'

शनिवार, 11 दिसंबर 2010

शिकायत

शिकायत किस ज़बां से मै करूं उनके आने की ।
यही अहसान क्या कम है कि मेरे दिल में रहते है ॥

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

शाम हो्ते ही



शाम हो्ते ही चिरागो को बुझा देता हूं मै
ये मेरा दिल ही काफ़ी है तेरी यादों में ज़लने के लिये

बुधवार, 24 नवंबर 2010

खुशी



खुशी ही हो हर गम के पीछे ये ज़रूरी तो नही
कभी-कभी गम भी बन ज़ाता है मुस्कुराने की वज़ह।

गुरुवार, 18 नवंबर 2010

तुम



ज़ब दूर चली ज़ाती हो तुम
तब सहा नही ज़ाता मुझसे
ज़ब सामने आ ज़ाती हो तुम
कुछ कहा नही ज़ाता मुझसे

शनिवार, 13 नवंबर 2010

सिर्फ़ तुम



नाम की क्या बात करते हो
चेहरे तक भूल ज़ाते है लोग
तुम समंदर की बात करते हो
यहां तो आँखों में डूब ज़ाते है लोग

गुरुवार, 11 नवंबर 2010

भूल ज़ाता हूं



भूल ज़ाता हूं सब कुछ ज़ब नज़र आता है तेरा चेहरा।

ज़ल्दी बताओ मेरी ज़ान कब आऊं बांध कर सेहरा॥

सोमवार, 8 नवंबर 2010

आँखो ही आँखो में

आँखो ही आँखो में दिल दे दिया हमने
ना तो नाम पूछा और ना ही पता पूछा हमने
अब कहाँ ढूंढू उसे तन्हाइयों के सिवा
नही मिलती वो कहीं दिल की गहराइयों के सिवा

शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

खुद्दारी




अमीरे शहर के तोहफे मुझे कबूल नही ।
जो भीख मे मिले तो इज़्ज़त भी छोड आऊगा ॥


जब कुछ नही था हमारे पास, तब भी ना बिके हम ।
अब क्या खाक खरीदेगे ये दुनिया वाले हमे ॥


शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010

तेरी याद में





खुद ही को भूल सा गया हूं मै,
क्यों इतना याद आती हो तुम्।
कभी तो सामने आ ज़ाओ मेरी ज़ान,
क्यों इतना सताती हो तुम्॥

गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010

प्यारे सपने




कितने प्यारे होते है सपने
लेकिन कडवी होती है हकीकत
ज़ीना तो लोग चाहते है सपनो में
लेकिन फ़िर भी ज़ीना पडता है हकीकत में

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010

तेरी नफ़रत




तेरी नफ़रत से नही डरता हूं मै।
डर है कहीं तू मुझसे प्यार ना कर बैठे॥


एक गम क्या देखा, हार मान बैठे इस ज़िंदगी से ।
और मै इस दिल मे गमों का दरिया समाए बैठा हूं॥

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

कुछ अनकही


हज़ारो बहाने है प्यार करने के लिये
फिर क्यों लोग एक बहाना ढूंढते है नफ़रत के लिए .....

सोमवार, 11 अक्टूबर 2010

यादें तेरी

यादें तेरी


साथ मेरे हो तुम अगर , तो इस ज़िंदगी को भी छोड देंगे।
एक बार कहकर तो देखो, सारे ज़माने का रुख मोड देंगे॥


अश्क है इन आंखो मे, दिल पर वीरानी छाई है।
क्या करूं मै,आज़ फ़िर उनकी याद आई है।